Monday, April 13, 2009

क्या निराष हुआ जाय ?

एक अजीब सा डर हर तरफ फैल चुका है हर किसी को किसी न किसी का डर सता रहा है कोई किरायदार से तो कोई मकानमालिक से डरता है कोई अध्यापक से तो कोई छात्र से डरता है कोई पुलिस से तो कोई चोर से डरता है कोई असफलता से तो कोई सफल होने से डर रहा है आखिर ये डर कहाँ से आ गया और क्यूँ एक अमर बेल की लता की तरह से हर किसी पर लिपट सा गया है और लोगों की हसी छीन रहा है क्या लोगों को समझ नहीं आता की इससे उनकी जिन्दगी का सारा रस ख़तम हो रहा है या लोग जन के भी अनजाने बने हुए हैं ..डरे हुए हैं..पर आखिर क्यूँ .. क्यूँ नहीं वो इस डर को उखर फेकते हैं क्यूँ नहीं वो फिर से एक दुसरे के और समीप आ बात चीत कर हर उलझन को सुलझा लेते हैं क्या हुआ है लोगों को ...

4 comments:

  1. कहां डर है। किससे डरे हुए हैं

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  2. आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं.
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  3. चिटठा जगत में आपका हार्दिक स्वागत है आपके लेखन के लिए हार्दिक शुभकामनाएं ...........

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